उमरे का तरीका


उमरे का तरीका समझने से पहले यहां बैतुल्ला में पहुंच कर एक बात खास तौर पर ध्यान रखें तो इन्शाअल्लाह आप बहुत तकलीफों से बच जायेंगे। यहां हुजूम और भीड़ बहुत ज़्यादा होती है इसकी वजह से बाज़ मरतबा साथी एक दूसरे से बिछड़ जाते हैं लिहाज़ा पहले ही तमाम साथी मिलकर कोई खास निशानी गैट वगैरा की अलामत तेय कर लें के तवाॅफ के दौरान अगर साथी एक दूसरे से बिछड़ गये तो सब उस जगह आकर इकटठे हो जाइंगे। खुसूसन जब आप के साथ मस्तूरात हों तो उस का ख्याल रखना बहुत ज़रूरी हैै। अब आप को उमरा करना बहुत ही आसान है। उमरे में आप को सिर्फ चार काम करने हैं।
1-एहराम  2-तवाॅफ, 3-सई  4-हल्क़ या क़सर।
तल्बिया -(1) उमरे की नीयत कर के

’’لَبَّیْکْ اَللّٰہُمَّ لَبَّیْکْ،لَبَّیْکْ لَاشَرِیْکَ لَکَ لَبَّیْکْ إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَۃَ لَکَ وَالْمُلْکَ لَاشَرِیْکَ لَکَ ‘‘َ

पढ़कर एहराम बांधना ये काम तो आप ने पहले ही कर लिया है।
(2) बैतुल्लाह का तवाॅफ करना रमल और इज़्तबा के साथ। तवाॅफ- बैतुल्ला के र्गिद बवुजू सात चक्कर लगाने को कहते हैं। अगर वुजू टूट जाये तो उसी जगह तवाॅफ का सिलसिला रोक देना लाज़िम है वुजू करके वहीं से तवाॅफ की तकमील की जा सकती है। लेकिन बेहतर ये है के अज़सरे नो तवाॅफ को लोटाया जाये।
रमल
रमल कांधे हिलाते हुए करीब करीब कदम रख कर ज़रा अकड़कर चलने को कहते हैं जैसे पहलवान अखाडे़ में चलता है रमल तवाॅफ के पहले तीन चक्करों में होता है।
इज्तबा
एहराम की चादर दाई़ बगल से निकालकर बांये कंधे पर रखना और दायां कंधा खुला छोड़ देने को कहते हैं इज्तबा तवाॅफ के सातों चक्करों में होता है। याद रखें! रमल और इज्तबा सिर्फ उस तवाॅफ में होता है जिसके बाद सई करनी है कोई नफली तवाॅफ कर रहा है तो उसमें रमल और इज्तबा नहीं होगा। रमल सिर्फ पहले तीन चक्करों में मसनून है अगर कोई पहले तीन चक्करों में करना भूल गया तो बाद के चक्करों में रमल न करे इसलिए के पहले तीन चक्करों में जैसे रमल करना सुन्नत है बाद के चक्रों में रमल न करना सुन्नत है। सातवां चक्कर पूरा करने के बाद इज्तबा खत्म कर दें दायां कांधा ढ़ांक दें बाज़ लोग नमाज़ में भी इज्तबा की हालत में होते हैं याद रखें इस तरह नमाज़ पढ़ना मकरूह है। (शामी जि.3.स.502.511.गुनयतुन्नासिक.स.99.100)

 

 

 

सफा मरवाह के दरम्यान सई करना
नीयत इस तरह करें ‘‘ऐ अल्ला मैं उमरे की सई करता हूं तू उसे आसान फरमा और कुबूल फरमा
हल्क़ यानी सर मुंढ़वाना
हल्क़ यानी सर मुंढ़वाना और क़स्र यानी बाल कतरवाना . बस ये चार काम आपने कर लिये तो आपका उमरा हो गया याद रख्ये उमरे के चार कामों में से दो काम फर्ज़ है एहराम और तवाॅफ और दो वाजिब।सई और हलक. या क़स्र