मस्जिदे हराम में दाखिल होना


आप अपने कमरे से बावुजू होकर और लब्बेक कसरत से पढ़ते हुए अजिज़ी के साथ मस्जिदे हराम की तरफ चलें आप मस्जिदे हराम में जिस दरवाजे से भी दाखिल हों सुन्नत के मुताबिक पहले दायां पैर रखें और मस्जिदे हराम में दाखिल हों साथ ही एतकाफ की नीयत करलें ताके जब तक आप मस्जिदे हराम में रहें ऐतकाफ का
सवाब मिलता रहे। दाखिल होते वक्त ये दुआ पढेंः-

’’بِسْمِ اللّٰہِ وَالصَّلٰوۃُ وَالسَّلَامُ عَلٰی رَسُوْلِ اللّٰہِ اَللّٰہُمَّ اغْفِرْلِيْ ذُنُوْبِیْ وَافْتَحْ لِیْ أَبْوَابَ رَحْمَتِکَ نَوَیْتُ سُنَّۃَ الْاِعْتِکَافِ‘‘ (ترمذی ۳۱۴)

जब आप अंदर पहुंच जाये तो बैतुल्ला शरीफ को देखने की एक मुस्तकिल सुन्नत ये है के जब भी मस्जिदे हराम में दाखिल हो तो बैतुल्ला पर नज़र पड़ते ही तीन बार अल्लाहुअकबर – तीन बार, लाइलाहा इल्ललाह और तीन बार अलहमदूलिल्लाह कहें बाज उलमा ने फरमाया है के जब भी बैतुल्लाह पर नज़र पडे़ ईद वाली तकबीरे तशरीक़ अल्लाहुअकबर अल्लाहुअकबर लाइलाहा इल्ललाहू वल्लाहुअकबर अल्लाहुअकबर वलिल्लाहिलहम्द एक बार पढ़ लें और खूब दुआ करें।
बैतुल्ला पर पहली निगाह पड़ते वक्त तमाम दुआएं कबूल होती हैं-;शामी जि03.स 502..द्ध बेहतर ये है के आप पेहली दुआ ये मांगे ‘ऐ अल्लाह मौत तक मेरी तमाम जाइज़ तमन्नाएं और दुआयें जो तुझको पसंद हों कबूल फरमा‘‘ इसके अलावा जो दुआएं मांगना चाहें मांग सकते हैं और जितनी देर मांगना चाहें मांग सकते हैं अपने लिये अपने घरवालों के लिए अपने खांदान के लिए पूरी उम्मत के लिए खूब गिड़गिड़ाकर अल्लाह से दुआ मागें उस वक्त तमाम दुआएं इन्शाअल्लाह कबूल होंगी।

मस्जिदे हराम में दाखिल होना


हज्जे इफराद‘‘ में सिर्फ हज की नीयत होती है।
हज्जे किरान‘‘ में हज उमरा दोनों की एक साथ नीयत की जाती है।
हज्जे तमत्तो‘‘ में सिर्फ उमरा की नीयत होती है।
दूसरा फर्कः- हज्जे इफराद और हज्जे किरान में एहराम शुरू से हज के खत्म तक बाकी रहता है
हज तमत्तो में उमरा करके एहराम खुल जाता है फिर हाजी अपने कपड़ों में रहता है। और
8 ज़िलहिज्जा को एहराम बांधता है़। ;शामी 557/ता.563द्ध
तीसरा फर्कः– हज्जे किरान और हज्जे तमत्तो में हज की कुरबानी वाजिब है। जबकि हज्जे इफराद में हज
की कुरबानी मुस्तहब है।
हज्जे तमत्तोः-तीनों किस्मों में अफज़ल हज है। आपको मक्कह मुकर्रमा पहुंचकर पहले उमरा करना है नीयत
इस तरह करें  ’’اَللّٰہُمَّ إِنِّيْ أُرِیْدُ الْعُمْرَۃَ فَیَسِّرْہَالِيْ وَتَقَبَّلْہَامِنِّيْ‘ ऐ अल्लाह ! मैं उमरे की नीयत करता हूं तू आसान फरमा और कबूल फरमा  नीयत करते ही बुलंद आवाज़ से तलबीह पढे़ंः

’’لَبَّیْکْ اَللّٰہُمَّ لَبَّیْکْ،لَبَّیْکْ لَاشَرِیْکَ لَکَ لَبَّیْکْ إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَۃَ لَکَ وَالْمُلْکَ لَاشَرِیْکَ لَکَ ‘‘