हज का बयान

اَعُوْذُ بِاللّٰہِ مِنَ الشَّیْطَانِ الرَّجِیْمِ بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْم۔ وَلِلّٰہِ عَلٰٓی النَّاسِ حِجُّ الْبَیْتِ مَنِ اسْتَطَاعَ اِلَیْہِ سَبِیْلاً۔
(سور�ۂ اٰل عمران آیت نمبر۹۷)

लौगों पर अल्लाह तआला का यह हक है के जो लौग इस्तिताअत रखते हों वोह उस के घर का हज करें इस आयत में उस सखत वईद की तरफ इशारा किया गया है के जो इस्तिताअत के बावजूद हज ना करे तो अल्लाह तआला को उस की कोइ परवाह नहीं।

घर से रवानगीः

अलहम्दो लिल्लाह फरीज़ा हज की अदायगी के लिए आप अपने घर से रवाना हो रहे हैं, आज वो मुबारक घड़ी आ गयी है जिसका बहुत दिनों से आपको इन्तजार था। रवानगी से पहले हो सके तो दो रकात नफिल नमाज़ पढ़ लें, नमाज़ के बाद सफर में सहूलत व आफियत की, गुनाहों से बचने की और हज की कबूलियत की दुआ कर लें। निकलने से पहले अपना सारा जरूरियात का सामान ले लें जो चीजें साथ ले जाना मना हैं वोह बिल्कुल न लें ताके कस्टम वगैराह में परेशानी न हो। अपने सामान को अच्छी तरह पैक करके बैग पर बडे़ हरफों में पूरा पता लिखें मुल्क का नाम भी ज़रूरी लिखें और अपने बैग पर ऐसी कोई अलामत ज़रूर रखें के देखते ही आप अपना सामान पहचान लें। घर से ये दुआ पढ़कर निकलेंः

’’بِسْمِ اللّٰہِ تَوَکَّلْتُ عَلَی اللّہِلَاحَوْلَ وَلَا قُوَّۃَإِلاَّ بِاللّہِ ،،۔ (ترمذی:۳۴۲۶،عن انسؓ)