शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बेहद मेहरबान,निहायत रहम वाला है।

मरने के बाद ज़िंदा होना। क़यामत के रोज़ सब कुछ खत्म हो जाएगा।हज़रत इस्राफील अलइहिस्ससलाम सूर फूकेंगे और दुबारा सब पहले जैसे हो जायेगा, एवम सब इंसान दुबारा ज़िंदा हो जाएगें। इसके बाद फैसले का दिन शुरू हो जाएगा, जो कामयाब होगा उसका नामाये आमाल दाहिने हाथ में दिया जाएगा, वो जन्नत मैं दाखिल होगा। जो अपने बुरे कामो की वजह से नाकामयाब होगा, उसका नामाये आमाल बायें हाथ मे दे दिया जाएगा, और उसको दोज़ख में डाल दिया जाएगा।

इस्लाम के स्तंभ

ईमान

नमाज

ज़कात

हज

रमज़ान के रोज़े रखना

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